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प्रेस विज्ञप्ति

बिजली क्षेत्र को नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए

13th फ़रवरी, 2014

भारतीय बिजली क्षेत्र काफी अधिक क्षमता जोड़ने की दहलीज पर खड़ा है जो विशेष रूप से मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करेगा। आज नई दिल्ली में भारतीय बिजली क्षेत्र (आईपीएस)-2014 जिसे उपयुक्त रूप से शक्तिशाली कल के लिए आज की रणनीति विषय दिया गया था, में भाग लेने वाले डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए श्री पी. के. सिन्हा, विद्युत सचिव, भारत सरकार ने कहा कि अब हमें भूमि की आवश्यकता, जल के उपयोग और अन्य संसाधनों में कमी के क्षेत्रों में मानक स्थापित करने पर ध्यान देने की जरूरत है। एनटीपीसी द्वारा आयोजित सम्मेलन 1982 में एनटीपीसी-सिंगरौली से पहली 200 मेगावाट इकाई से उत्पादन की शुरूआत के उपलक्ष्य में एक वार्षिक कार्यक्रम है। श्री सिन्हा ने चालू वर्ष में बिजली क्षेत्र के विकास पर संतोष व्यक्त किया तथा इस क्षेत्र में सुधार के लिए नवीनतम प्राैद्योगिकियों के उपयोग और नए पहल पर बल दिया।

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सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में श्रीमती नीरजा माथुर, अध्यक्ष, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, डा. अरूप रॉय चौधरी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनटीपीसी और डीवीसी तथा श्री एन. एन. मिश्रा, निदेशक (प्रचालन), एनटीपीसी ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर सचिव, विद्युत और अध्यक्ष, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए व्यावसायिक उत्कृष्टता पुरस्कार एनटीपीसी-रामागुंडम को प्रदान किया गया और एनटीपीसी-ऊंचाहार को उप विजेता पुरस्कार प्रदान किया गया। श्री सिन्हा ने इस अवसर पर बिजली संयंत्र के संचालनों के तकनीकी दस्तावेजों पर दो सार-संग्रहों के साथ एनटीपीसी और अमेरिकी सहायता द्वारा प्रकाशित अति महत्वपूर्ण इकाइयों के लिए श्रेष्ठ आचरण मैनुअल का विमोचन भी किया।

अपने संबोधन में श्रीमती नीरजा माथुर, अध्यक्ष केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ज्ञान और अनुभव को साझा करने हेतु इस सम्मेलन के आयोजन के लिए एनटीपीसी की सराहना की। उन्होंने बिजली क्षेत्र में दक्षता, सुस्थिरता और ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, डा. अरूप रॉय चौधरी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि एनटीपीसी को देश में बिजली उत्पादन में तेजी लाने के लिए बनाया गया था और यह उत्पादन में क्षमता वृद्धि और मानकों के सृजन के माध्यम से भारत सरकार की योजना को संवर्धित करना जारी रखेगा। उन्होंने दुनिया के औसत की तुलना में देश में बिजली की प्रति व्यक्ति कम खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली क्षेत्र के विकास के लिए काफी अधिक गुंजाइश की बात की।

श्री एन. एन. मिश्रा, निदेशक (प्रचालन) ने इस क्षेत्र में चुनौतियों और एनटीपीसी ने कैसे कोयले की गुणवत्ता, मात्रा और परिवहन में सुधार लाने के लिए उन चुनौतियों का सामना किया इस बारे में की बात की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य पीएटी (प्रदर्शन करना प्राप्त करना और व्यापार करना), रणनीतियों को साझा करना, उपभोक्ता को सप्ताह के सातो दिनों में 24 घंटे निरन्तर सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए चुनौतियों की पहचान करना है।

देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी एनटीपीसी देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है और देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान दे रहा है। 17 कोयला आधारित, 7 गैस आधारित, 3 सौर अक्षय ऊर्जा और 7 संयुक्त उद्यम बिजली स्टेशनों के माध्यम से 42,464 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ, एनटीपीसी भारत की स्थापित क्षमता के लगभग 19 प्रतिशत के साथ, देश में बिजली के 28 प्रतिशत का योगदान देता है।


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