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प्रेस विज्ञप्ति

विद्युत क्षेत्र असाधारण वृद्धि और रोजगार के अवसरों के साथ सर्वाधिक गतिशील क्षेत्र है: श्री सुशीलकुमार शिंदे

15th अगस्त, 2010

केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री सुशीलकुमार शिंदे ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्युत क्षेत्र अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक गतिशील क्षेत्र होने के नाते युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। इन्डक्शन प्रोग्राम ऑफ एग्जिक्युटिव ट्रेनी-2010 के उद्घाटन के अवसर पर एनटीपीसी के युवा अभियंताओं को संबोधित करते हुए आज उन्होंने कहा कि देश की अग्रणी विद्युत कम्पनी में कार्य करने से उनके पास वर्ष 2012 तक ‘सभी के लिए विद्युत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति का एक अवसर है।

इस बैच में देश के प्रमुख संस्थानों से परिसर भर्ती द्वारा चुने गए मैकेनिकल, इलैक्ट्रिकल, कंट्रोल एण्ड इंस्ट्रुमेंटेशन तथा सिविल इंजीनियरी के विषयों से 374 प्रशिक्षु शामिल हैं। बैच में 47 महिला अभियंता हैं तथा ये देश के लगभग सभी राज्यों से आए प्रशिक्षुओं के साथ लघु भारत के सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हुए विविधता से परिपूर्ण है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री भरत सिंह सोलंकी ने एनटीपीसी में कार्यभार संभालने वाले इन युवा अभियंताओं को रत्नों से तुलना करते हुए कहा कि वे राष्ट्र की सेवा हेतु इस राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनें।

भारतीय विद्युत क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले महानुभावों श्री पी उमा शंकर, सचिव विद्युत, भारत सरकार; श्री पी गुरदयाल सिंह, अध्यक्ष, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण; श्री आर एस शर्मा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनटीपीसी ने विद्युत क्षेत्र तथा एनटीपीसी से जुड़ने वाले इन युवा अभियंताओं का स्वागत किया। श्री शिंदे ने 2008 बैच के प्रतिभाशाली प्रशिक्षुओं को स्वर्ण और रजत पदक प्रदान किए।

32194 मेगावॉट की स्थापित क्षमता के साथ एनटीपीसी भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी है। वर्तमान में कंपनी की 17 स्थानों पर 17,000 मेगावॉट से अधिक क्षमता निर्माणाधीन है और वर्ष 2017 तक इसकी योजना 75 गीगावॉट कंपनी बनने की है।

विद्युत क्षेत्र असाधारण वृद्धि और रोजगार के अवसरों के साथ सर्वाधिक गतिशील क्षेत्र है: श्री सुशीलकुमार शिंदे

श्री सुशीलकुमार शिंदे ने इन्डक्शन प्रोग्राम ऑफ एग्जिक्युटिव ट्रेनी-2010 का उद्घाटन करते हुए एनटीपीसी 2008 बैच के प्रतिभाशाली प्रशिक्षुओं को स्वर्ण और रजत पदक प्रदान किए।


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