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प्रेस विज्ञप्ति

केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सी ई आर सी) ने ग्राहकों के साथ 37,000 मेगावाट के लिए एनटीपीसी के पीपीए को मान्य किया

29th अप्रैल, 2013

केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सी ई आर सी) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय एनटीपीसी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किये गये विद्युत क्रय करारों को वैध तथा निर्धारित ढांचे तथा समय के अंतर्गत समझौतों के अनुरुप बताते हुए मान्य किया है। विद्युत उत्पादक संघ (एओपीपी) ने सी.ई.आर.सी. के समक्ष प्रस्तुत याचिका में 1 अक्टूबर, 2010 तथा 5 जनवरी, 2011 के बीच एनटीपीसी द्वारा किये विद्युत क्रय समझौतों का विरोध किया था।

सी ई आर सी आदेश में यह भी स्वीकारा गया कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 60 के तहत, जिसमें उत्पादक की बाजार में प्रबलता का संदर्भ है, सी पी एस यू को कोई निर्देश दिया जाना अपेक्षित नहीं है। सी ई आर सी को ए ओ पी पी के प्रस्तुतीकरण को भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग को संदर्भित करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं हुई।

आदेश में आगे विद्युत उपयोगिता की 13वीं योजना तक 37,000 मेगावाट क्षमता की वृद्धि करने तथा इस प्रकार उत्पादित विद्युत की आपूर्ति संपूर्ण देश में 37 लाभार्थीयों को इस अवधि के दौरान हस्ताक्षरित पीपीए के जरिए आपूर्ति करने की योजना को बढ़ावा दिया गया है।

पहली अक्तूबर, 2010 से 5 जनवरी, 2011 की अवधि के बीच अपने ग्राहकों के साथ हस्ताक्षरित एनटीपीसी के पीपीए को खारिज करने का अनुरोध करते हुए बारह विद्युत उत्पादकों नामतः अदानी पावर, ए ई एस (इंडिया), सी एल पी पावर इंडिया, रिलांयस पावर, एस्सार पावर, जी एम आर एनर्जी, टाटा पावर, जी वी के गौतमी पावर, इंडिया बुल्स पावर, जिंदल पावर, जे एस डब्ल्यू एनर्जी एवं लैनको इन्फ्राटेक ने सी ई आर सी के समक्ष एक संयुक्त याचिका दायर की। विद्युत उत्पादकों ने विद्युत विनियामक आयोग से एक निदेश जारी करने की मांग भी यह सुनिश्चित करने के लिए की कि केंद्रीय उपयोगिता ऐसे पीपीए निष्पादित करते समय उत्पादक तथा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी प्रभावी स्थिति का दुरूपयोग न करे। ए ओ पी पी ने मामला प्रतिस्पर्धा आयोग को संदर्भित करने हेतु सी ई आर सी की अनुमति हेतु अनुरोध भी किया।

सी ई आर सी ने ए ओ पी पी की शिकायतों की जांच करते हुए इन तथ्यों को संज्ञान में लिया कि देश की संस्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में एनटीपीसी का हिस्सा मात्र 19.50 प्रतिशत था जिसे बाजार प्रबलता नहीं माना जा सकता। दूसरे, वर्ष 2005 तथा वर्ष 2011 के बीच एनटीपीसी द्वारा हस्ताक्षरित पीपीए 52,000 मेगावाट के लिए थे जो निजी प्रतिभागियों द्वारा 1,05,000 मेगावाट की चालू तथा निर्माणाधीन क्षमता से कम (लगभग 50 प्रतिशत) थे। अतः निजी प्रतिभागियों का यह दावा कि उनके प्रचालन एनटीपीसी के पीपीए द्वारा प्रभावित हुए हैं, अस्वीकार्य है।

सी ई आर सी ने आगे व्यक्त किया कि सी पी एस यू के प्रशुल्क का निर्धारण आयोग द्वारा उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देते हुए इसकी शर्तों तथा निबंधनों के अनुसार किया जाता है। पीपीए पर हस्ताक्षर प्रशुल्क नीति के ढांचे के अंतर्गत किए गए थे तथा इसलिए इन्हें प्रतिस्पर्धारोधी नहीं कहा जा सकता। इसने यह उल्लेख भी किया कि कोयला, वित्तपोषण इत्यादि जैसे अपप्रवाही बाजारों की समयपूर्व बंदी (बाध्य बंदी) किसी सुदृढ़ साक्ष्य के समर्थन के बिना मात्र अनुमान ही हैं।


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