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प्रेस विज्ञप्ति

वि़द्युत उत्‍पादन परिदृश्‍य की पुन: परिभाषा

08th नवम्बर, 2016

एनटीपीसी के तीसरे अंतरराष्‍ट्रीय तकनीकी समिट ‘’विद्युत उत्‍पादन परिदृश्‍य की पुन: परिभाषा’’ का उद्घाटन करते हुए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में सचिव (एमओ ई एफ) श्री ए. एन. झा ने भारत के 1.2 बिलियन लोगों की विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा प्रदान करने तथा पर्यावरण को न्‍यूनतम क्षति सुनिश्चित करने के लिए तरीके खोजने के लिए एनटीपीसी को एक उत्‍तरदायी विद्युत उत्‍पादक की संज्ञा दी। श्री झा ने कहा कि प्रौद्योगिकी का सभी विकास गतिविधियों में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है और यह सबसे उपयुक्‍त विषय वस्‍तु है। 1 करोड़ पौधे लगाकर कार्बन सिंक में सुधार लाने के लिए उन्‍होंने एनटीपीसी के योगदान की सराहना की।

सीईए के अध्‍यक्ष (चेयर पर्सन) श्री एस.डी. दुबे, सीईआरसी के सदस्‍य श्री ए.एस. बख्‍शी, सीईआरसी के सदस्‍य श्री ए.के. सिंघल, सीईआरसी के सदस्‍य श्री एम.के. अय्यर, एनटीपीसी के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री गुरदीप सिंह सहित एनटीपीसी के वरिष्‍ठ अधिकारी तथा अंतरराष्‍ट्रीय एवं भारतीय प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

समिट के लिए कुल मिलाकर 275 दस्‍तावेज प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 71 दस्‍तावेज प्रस्‍तुति के लिए चुने गए हैं, जिनमें विश्‍व के विकसित देशों से 41 अंतरराष्‍ट्रीय दस्‍तावेज शामिल हैं। सभी दस्‍तावेजों का संक्षिप्‍त विवरण उद्घाटन समारोह के दौरान जारी किए गए कम्‍पेंडियम में है। सभी तकनीकी दस्‍तावेज इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से प्राप्‍त और प्रोसेस किए जाने और सभी प्रतिनिधियों के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक प्रारूप में कम्‍पेंडियम जारी किए जाने से समिट का अधिकतर कामकाज कागज रहित रहा।

सीईए के अध्‍यक्ष श्री एस.डी. दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में विद्युत क्षेत्र की तकनीकी अनिवार्यता कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हुए सकल घरेलू उत्‍पाद प्रगति को सहयोग देने के लिए सक्षम, विश्‍वस्‍त और आर्थिक तौर पर व्‍यवहार्य ऊर्जा प्रदान करने के लिए बेहद संभाव्‍य लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों को ध्‍यान में रखते हुए निरंतर प्रगति को कायम रखना है।

सीईआरसी के सदस्‍य श्री एम.के. अय्यर ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऊष्‍मायन की मौजूदा चुनौतियों के संदर्भ में समिट की विषय वस्‍तु, खास तौर से 5 आर – न्‍यूनीकरण, पुन: उपयोग, नवीकरणीय, रिट्रोफिट और पुनर्निर्माण की धारणा की सराहना की। उन्‍होंने उपभोक्‍ता पर न्‍यूनतम अतिरिक्‍त भार के साथ वैश्विक उत्‍सर्जन घटाने की चुनौतियों का शीघ्र समाधान करने के लिए लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों का समावेशन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
एनटीपीसी के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री गुरदीप सिंह ने मौजूदा जीवाश्‍म ईंधनों के प्रचालन को इष्‍टतम बनाते हुए नवीकरणीय क्षेत्र में वृद्धि के माध्‍यम से विद्युत क्षेत्र में एनटीपीसी के बाजार नेतृत्‍व कायम रखने की बात कही।

उन्‍होंने जानकारी दी कि एनटीपीसी की वर्तमान कोयला आधारित क्षमता का वर्धन का 90 प्रतिशत से अधिक न्‍यून कार्बन फुटप्रिंट, उच्‍च दक्ष्‍ाता और एससी/यूएससी इकाइयां है। उन्‍होंने बताया कि भारत सरकार की 100 गीगावाट (सौर) की सकल प्रतिबद्धता में से 10 गीगावाट का वर्धन करने की एनटीपीसी की प्रतिबद्धता वर्ष 2022 के लक्ष्‍य के अनुरूप है।

एनटीपीसी के निदेशक (तकनीकी) श्री ए.के. झा ने अपने संबोधन में भारतीय बाजार के संदर्भ में एनटीपीसी के लिए परिप्रेक्ष्‍यों की चर्चा की और बताया, कि यद्यपि भारत की ऊर्जा मांग और आपूर्ति पर दीर्घकालीन आईईए अनुमानों को पूरा करने की संभावना है, वर्तमान मध्‍यावधि में नवीकरणीय के अतिरिक्‍त कोयला आधारित उत्‍पादन में पर्याप्‍त वृद्धि दिखाई देगी।

समारोह के पश्‍चात आईईए, पेरिस; फर्स्‍ट सोलर, यूएसए; जीई, स्विट्जरलैंड; स्टिएग, जर्मनी और भारतीय विद्युत क्षेत्र के प्रख्‍यात वक्‍ताओं के साथ ‘‘बदलता ऊर्जा परिदृश्‍य:चुनौतियां और अवसर’’ पर पैनल चर्चा संपन्‍न हुई।


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