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प्रेस विज्ञप्ति

बिजली की मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा के सभी उपलब्ध स्रोतों के दोहन के लिए अनुसंधान और विकास के प्रयास

31st मार्च, 2016

ऊर्जा सुरक्षा के लिए हाल में सम्पन्न दो दिवसीय एनटीपीसी - नेत्रा अनुसंधान और विकास सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष, डॉ. अनिल काकोड्कर ने कहा कि भारत एक सुनियोजित तरीके से बिजली के नवीकरणीय और परंपरागत स्रोतों के अधिकतम उपयोग के नए युग के शीर्ष पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत एक विशाल देश है और ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के लिए ऊर्जा मिश्रण के अभिन्न अंग के रूप में सभी उपलब्ध स्रोतों का उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि किसी देश में लोगों के जीवन की गुणवत्ता सीधे बिजली की औसत खपत के सापेक्ष है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा भविष्य के ऊर्जा के स्रोत हैं और अन्य सभी संसाधन समय के साथ समाप्‍त हो जाएंगे। उन्होंने कोयले और काफी अधिक राख सामग्री आदि जैसी विशेष भारतीय आवश्यकताओं के संदर्भ में मांग प्रेरित अनुसंधान एवं विकास और स्वदेशी समाधान की जरूरत पर बल दिया।

नीति आयोग के सदस्‍य, डॉ. वी. के. सारस्वत ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को समाप्‍त करके उनके लिए खतरा पैदा करते हुए ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को शामिल करके तेज गति से ऊर्जा की मांग के बढ़ने के साथ गंभीर व संकटपूर्ण स्थिति में है। उन्होंने दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्योति योजना, राष्ट्रीय सौर मिशन और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी भारत सरकार द्वारा शुरू की गई नई योजनाओं के माध्यम से बिजली क्षेत्र के लिए नए प्रोत्साहनों के बारे में उल्लेख किया, जो ऊर्जा के सभी स्रोतों का दोहन करने के लिए एक समेकित दृष्टिकोण हैं। उन्होंने सुदुढ़ अनुसंधान और विकास अवसंरचना की मजबूती और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए एनटीपीसी की भूमिका पर बल दिया। डॉ. सारस्वत ने ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव को कम करने जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझाने और बिजली संयंत्रों के उपकरणों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में नेत्रा के प्रयासों की सराहना की।

टेरी के महानिदेशक, डॉ. अजय माथुर ने कहा कि एनटीपीसी ने बिजली के क्षेत्र में सफलता के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में दक्षता, विश्वसनीयता और सामर्थ्‍य के माध्यम से इस क्षेत्र में उत्कृष्टता को संस्थागत स्वरुप दिया है।

एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री गुरदीप सिंह ने सम्मेलन से अपेक्षाओं पर बात करते हुए कहा कि वे उपभोक्ताओं के लिए सस्ती बिजली, नवीकरणीय और परंपरागत स्रोतों से उत्पादित बिजली का ग्रिड के साथ एकीकरण जैसे क्षेत्र में उभरती हुई नई चुनौतियों के समाधान की उम्‍मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा का भंडारण, जल संरक्षण, राख की उपयोगिता के प्रति लक्षित अनुसंधान संबंधी कार्यक्रम समय की मांग है।

एनटीपीसी के निदेशक (तकनीकी), श्री ए. के. झा ने उच्च विकास योजना की चुनौतियों का सामना करने और ऊर्जा स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उच्च प्रौद्योगिकी उन्मुख सक्रिय और सहयोगी अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

गणमान्य व्यक्तियों द्वारा इस अवसर पर तकनीकी पेपर्स और एनटीपीसी - नेत्रा की तकनीकी पत्रिका के सारांशों के एक संग्रह का विमोचन किया गया। इस सम्मेलन ने दुनिया भर से बिजली के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान एवं विकास पहलों को साझा करने के लिए एक उपयुक्त अवसर प्रदान किया है।


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