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प्रेस विज्ञप्ति

एनटीपीसी ने कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सीएएक्‍यूएमएस) की स्थापना और कमीशनिंग के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की पेशकश की

26th फ़रवरी, 2020

नई दिल्ली, 26 फरवरी, 2020: भारत के सबसे बड़े विद्युत उत्पादक एनटीपीसी लिमिटेड ने कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सीएएक्‍यूएमएस) की स्थापना और कमीशनिंग के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एनटीपीसी 6 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 25 सीएएक्‍यूएमएस की स्थापना के लिए 80 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। सीएएक्‍यूएमएस, ग्वालियर (मध्य प्रदेश), रांची (झारखंड), पटना (बिहार), वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद (सभी उत्तर प्रदेश में), पिंपरी - चिंचवाड़ (महाराष्ट्र) और मदुरै (तमिलनाडु) में स्थापित किया जाएगा। इन शहरों के साथ, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव (पोर्ट ब्लेयर, सिलवासा और दमन) में भी सीएएक्‍यूएमएस स्थापित किए जाएंगे।

समझौता ज्ञापन पर सीपीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. प्रशांत गर्गवा और एनटीपीसी लिमिटेड के महाप्रबंधक (कॉर्पोरेट पर्यावरण प्रबंधन) श्री रवि वी. बाबू ने निदेशक (प्रचालन) श्री प्रकाश तिवारी, अध्‍यक्ष सह प्रबंध निदेशक के कार्यकारी निदेशक श्री रमेश बाबू वी., और मुख्‍य महाप्रबंधक (एसएसईए) श्री बी. बसु की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

इन स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग संबंधित शहरों के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक मूल्यांकन के लिए इनपुट के रूप में किया जाएगा। एनटीपीसी विभिन्न तरीकों से प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, पावर मेजर ने सतत परिचालन की दिशा में एक और उपलब्‍धि प्राप्‍त की है।

इसके अलावा, प्रदूषण पर अंकुश लगाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, एनटीपीसी ने दिल्ली एनसीआर में अपने दादरी प्लांट में पारंपरिक बॉयलरों में सह-फायर किए जा सकने वाले म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्‍ल्‍यू) को उच्च सकल कैलोरी मान (जीसीवी) ईंधन में

परिवर्तित करने की तकनीक भी लागू की है। ऐसा करते हुए, एनटीपीसी ने कचरे को ऊर्जा में बदलने के प्रयास में वैश्विक अग्रदूतों में से एक दुर्लभ स्‍थान प्राप्‍त किया है। एनटीपीसी ने विंध्याचल में अपनी पहली एफजीडी इकाई शुरू की है और इसके सभी विद्युत संयंत्रों में इस पारिस्‍थितिकी-अनुकूल तकनीक को लागू करने की प्रक्रिया जारी है।


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