मीडिया

प्रेस विज्ञप्ति

एनटीपीसी द्वारा कृषि में फ्लाई एश के उपयोग को बढ़ावा

02nd सितम्बर, 2016

किसानों द्वारा देश में उत्‍पादित कुल राख का करीब 5% भी उपयोग करने से कृषि उत्‍पादन में भारी बढोत्‍तरी हो सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा और जीडीपी के विकास को बढाने में मदद मिल सकती है। भारतीय भू-विज्ञान संस्‍थान के तत्‍वावधान में देश की सबसे बड़ी विद्युत उत्‍पादक कंपनी एनटीपीसी द्वारा ‘कृषि में फ्लाइ एश का सुरक्षित उपयोग’ विषय पर भोपाल में संयुक्‍त रूप से आयोजित राष्‍ट्रीय स्‍तर की कार्यशाला में कुछ इस प्रकार की टिप्‍पणी की गई थी। इस कार्यशाला का उद्घाटन मध्‍यप्रदेश सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव डॉ. राजेश राजोरा तथा एनटीपीसी के निदेशक (प्रचालन) श्री कौशल किशोर शर्मा तथा नई दिल्ली स्‍थित आईसीएआर के अपर महानिदेशक डॉ. एस.के. चौधरी द्वारा किया गया। 

इस कार्यशाला में देश के प्रख्‍यात कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्‍न कृषि जलवायु परिस्‍थितियों में भूमि एवं फसलों के विभिन्‍न किस्‍मों में फ्लाई एश के उपयोग से जुड़े अपने निष्‍कर्षों को प्रस्‍तुत किया। यह बाताया गया कि कृषि क्षेत्र में फ्लाई एश के उपयोग को बढावा देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में ताप विद्युत संयंत्रों के आसपास के खेतों एवं फार्मों में प्रदर्शन परियोजनाएं आयोजित की गई थी। निष्‍कर्षस्‍वरूप यह तथ्य उभर कर आया कि फ्लाई एश से भूमि अथवा मिट्टी को फसल उत्‍पादकता बढाने के लिए आवश्‍यक पोषक तत्‍व प्राप्‍त होते हैं।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन राष्‍ट्रीय स्‍तर के कई अनुसंधान संस्‍थानों तथा कृषि विश्‍वविद्यालयों द्वारा किए गए अनुसंधान तथा प्रदर्शन परियोजनाओं के द्वारा कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में विद्युत उत्पादन के दौरान उत्सर्जित फ्लाई एश को कृषि उत्‍पादकता बढाने सहित कर्इ मायने में उपयोगी पाया गया है। फ्लाई एश के उपयोग से फसल में कीट के प्रकोप तथा कार्बन डाईआक्‍साइड उत्‍सर्जन को कम करने में भी मदद मिलती है। 

यह निष्कर्ष भी निकला कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मार्गदर्शन में भारतीय भू-विज्ञान संस्‍थान द्वारा ओयूएटी, भुवनेश्‍वर, पश्‍चिम बंगाल के बिधान चंद्र कृषि विश्‍वविद्यालय, आईजीएफआरआई, झांसी भोपाल के आइआइएसएस तथा नई दिल्‍ली के आईएआरआई में विभिन्‍न प्रकार की मिट्टियों, कृषि जलवायु परिस्‍थितियों तथा विभिन्‍न फसलों, सब्‍जियों पर  देश भर के विभिन्‍न पांच स्‍थानों पर अत्‍याधुनिक अनुसंधान अध्‍ययन किए जाएंगे।

इस कार्यशाला में बिधान चंद्र कृषि विश्‍वविद्यालय, ओयूएटी, आईजीएफआरआई, झांसी, एनबीआरआई, लखनऊ, एएमपीआरआई, भोपाल, आईआईएसएस, भोपाल, सीआइएमएफआर, धनबाद के प्रख्‍यात वैज्ञानिक तथा विद्युत मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण, एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक श्री एस.एन. गांगुली, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक आदि ने हिस्‍सा लिया। 


« पीछे प्रेस विज्ञप्ति