मीडिया

प्रेस विज्ञप्ति

एनटीपीसी के कोयले के भंडार में आग लगी

03rd अक्टूबर, 2020

Dhanbad/ Ranchi, 3rd October, 2020: एनटीपीसी पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना में खनन कार्य को रोके जाने के कारण खदान से निकले कोयले में आग लग गई है। जगह जगह धुआं उठ रहा है। अगर जल्द ही कोयले को नहीं हटाया गया तो आग भीषण हो जायेगी और इस पर काबू पाना लगभग असंभव हो जायेगा।

ज्ञात हो कि कुछ निहित स्वार्थ से प्रेरित लोगों के कारण कोयले के ट्रांसपोर्ट का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। खनन कार्य पिछले 2 सितंबर से बंद है और लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन कोयला इकट्ठा हो चुका है। कोयले को यदि जल्दी नहीं हटाया गया तो पूरे कोयले के भंडार में भीषण आग लग जाएगी क्योंकि इलाके में दिन में तापमान अभी भी 35 डिग्री के आसपास है।

एक जिम्मेदार कम्पनी होने के नाते एनटीपीसी ने खान से निकले कोयले को अलग-अलग आठ ढेरों में रखा है जिससे किसी तरह की आकस्मिक दुर्घटना होने की स्थिति में अग्निशमन के कार्य में आसानी हो। कोयला जलने की स्थिति में राष्ट्र की इस प्राकृतिक संपदा का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही, पर्यावरण को भी हानि हो रही है।

खनन और ट्रांसपोर्ट कार्य को पुन: शुरू किए जाने के लिए 18 सितंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया था जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं एनटीपीसी के चेयरमैन के मध्य वार्ता हुई थी। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद भी कार्य आरंभ नहीं करने दिया गया है तथा अड़चन बनी हुई है। कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा एनटीपीसी के अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है और उन्हें कार्यस्थल पर धमकाया जा रहा है।

कोयला ढुलाई न होने से केंद्र सरकार को 67.71 करोड़ रुपए एवं राज्य सरकार को 31.24 करोड रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। इस परियोजना से रोजाना 40,000 मेट्रिक टन कोयला 9 रेक में भरकर एनटीपीसी की 21 परियोजनाओं को जाता है। कोयला ढुलाई ना हो ना हो पाने की स्थिति में एनटीपीसी को 91.20 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। रेलवे को भी प्रतिदिन की दर से ₹10 करोड़ की हानि हो रही है।

ट्रांसपोर्ट से जुड़े कई लोगों ने बैंकों से कर्ज लेकर अपने वाहन कोयला ढुलाई के काम में लगा रखे हैं। वे भी काम ना होने की स्थिति में भुखमरी के कगार पर हैं और ऊपर से बैंक की किस्तें चुकाने की समस्या आ खड़ी हुई है। कर्मचारियों को "काम नहीं तो वेतन नहीं" के आधार पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है।

प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कोयला ढुलाई व्यापार से जुड़े लोगों और स्थानीय लोगों की कमाई पर भी व्यापक असर पड़ा है तथा हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। त्योहारों का मौसम है और ऐसे में लोगों को काली दिवाली मनाने पर विवश किया जा रहा है। इस अनावश्यक रोक का अगर परिणाम नहीं निकला तो कई घर बर्बाद हो जाएंगे।


« पीछे प्रेस विज्ञप्ति