कारपोरेट नागरिकता

आर एवं आर योजनाओं के क्रियान्वयन के परिणाम

एनटीपीसी ने वर्ष 1993 में विश्व बैंक के साथ ''समय स्लाईस ऋण" के भाग में रूप में 400 मिलियन डालर का ऋण (ऋण 3632-आईएन) निष्पादित किया था। आर एवं आर से संबद्ध पहलों का उद्देश्य एनटीपीसी परियोजनओं के साथ जुड़े पर्यावरणीय तथा पुनर्वास तथा पुनर्स्थापन मुद्दों का निवारण करने की एनटीपीसी की क्षमता को सुदृढ़ करना था। 1993 से पूर्व क्रियान्वित पुरानी परियोजनाओं के लिए उपचारत्मक कार्य योजनाओं (आरईएपी) के निरूपण के अलावा ऋण करार के भाग के रूप में विकसित 1993 की एनटीपीसी आर एवं आर नीति के उपबंधों के अनुसार रिहंद II तथा विंध्याचल II परियोजनाओं (प्रमुखतः प्रस्तावित विस्तारों/योजनाओं के लिए एष डाईक क्षेत्र) के लिए, जिन्हें प्रस्तावित निधियन के लिए प्रस्तुत किया गया था, पुनर्वास कार्य योजनाएं निरूपित की गई थी। यद्यपि रिहंद स्टेज II परियोजना को तदनंतर छोड़ दिया गया था तथा निधियन के लिए उसे कायमकुलम परियोजना द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, फिर भी आरएपी तैयार किए गए तथा विश्व बैंक पर्यवेक्षी मिशनों के जरिए उनका आकलन किया गया। कायमकुलम आरएपी को भी तैयार किया गया था तथा पूर्व में उल्लिखित आरएपी के अतिरिक्त उसका भी आकलन किया गया।

सिंगरौली क्षेत्र में एनटीपीसी परियोजनाओं के आर एवं आर मुद्दे विस्तृत समीक्षाधीन रहे थे तथा अनुमोदित आरएपी के अनुसार आर एवं आर क्रियाकलापों के क्रियान्वयन की अवधि के दौरान बाह्य पगधारकों द्वारा उनका आकलन किया गया। कुछ एनजीओ तथा कार्यकर्ताओं द्वारा शिकायत के उपरान्त, 1997 में एनटीपीसी परियोजना में एक निरीक्षण पैनल (आईपी) को प्रस्तुत की गई थी। निरीक्षण पैनल रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न कार्यवाइयों के भाग के रूप में, पर्णधारकों के परामर्श तथा उनकी सहमति से एक स्वतंत्र अनुवीक्षण पैनल (आईएमपी) की स्थापना की गई। इस पैनल के विचारार्थ विषयों (टीओआर) के अनुसार अन्य उद्देश्यों तथा कार्यों के अलावा, पैनल को प्रणालीबद्ध तथा नियमित रूप से आर एवं आर कार्यक्रम के क्रियान्वयन की समीक्षा करनी थी तथा उसके संबंध में परामर्श देना था।

आईएमपी ने स्थल के अनेक दौरे किए तथा पीएपी, राज्य सरकार, विश्व बैंक तथा विद्युत मंत्रालय के साथ अनेक बैठकें आयोजित की। तत्पश्चात आईएमपी ने अपनी रिपोर्ट दी तथा उसे दिसम्बर, 1998 में विश्व बैंक को प्रस्तुत किया गया। यह रिपोर्ट प्रमुखतः चरणः II के पीएपी-जो 1993 के पश्चात पुनः अवस्थित किए गए/प्रभावित हुए, की पुनर्वास प्रक्रिया से संबंद्ध थी। विभिन्न मुद्दों के समाधान के पश्चात, एनटीपीसी द्वारा कतिपय कार्यवाही बिंदु क्रियान्वयन हेतु चिन्हित किए गए। सम्मत कार्रवाई बिन्दु पुनर्वास कार्यवाही योजना निरूपित करने के लिए दस्तावेजों से लिए गए थे।
 

आईएमपी सिफारिशों के अनुसार संशोधित कार्यवाई योजनाओं का क्रियान्वयन

आर एवं आर कार्य योजनाओं को फरवरी 1999 में निम्नानुसार पांच दस्तावेजों में संशोधित किया गया थाः
रिहंद II तथा विंध्याचल II के लिए 2 आरएपी संषाधित किए गए तथा रिहंद I, विंध्याचल 1 तथा सिंगरौली के लिए तीन आरएपी संशोधित किए गए। विश्व बैंक ने उपरोक्तानुसार संशोधित कार्रवाई योजनाओं के क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण तथा आकलन जारी रखा, अंतिम पर्यवेक्षी मिशन मई, 2003 में पूरा हुआ। संशोधित योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आईएमपी को भी शामिल किया गया। विश्व बैंक द्वारा यह अभिस्वीकृत किया गया कि योजनाओं के अनुसार हकदारिता परिदाय लगभग पूर्ण था (98 % से अधिक उपलब्धि)। शेष 2% में प्रमुखतः पता न लग पाए पीएपी शामिल थे। लगातार प्रयासों के बावजूद तथा यहां तक कि अनेक सार्वजनिक सूचनाओं के बावजूद भी उनका पता नहीं लग पाया था। इसमें पीएपी का एक लघु वर्ग भी संघटित था जिन्होंने अनेक परामर्श के बावजूद आईएमपी के साथ सम्मत पैकेज को स्वीकार नहीं किया।

सामाजिक प्रभावों के प्रभावी प्रबंधन के लिये विश्व बैंक पूर्णतः की सीमा से अधिक तथा विश्व बैंक के आकलन हेतु नैगम स्तरीय नीति गत पहले :

विश्व बैंक के साथ दस वर्षीय संबंधों ने विशेषतः सामाजिक क्षेत्र में एनटीपीसी को महत्त्वपूर्ण अधिगम (लर्निंग) प्राप्त हुई है। जैसा कि एड मेमोयर में भी प्रकाशित किया गया था, आर एवं आर क्रियाकलापों की पूर्ति के पश्चात् आगे भी परियोजनाओं में सामुदायिक विकास के सामान्य क्रियाकलाप जारी रखने की आवश्यकता महसूस की गई। इस प्रकार 2004 में एनटीपीसी ने एक कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समुदाय विकास (सीएसआर-सीडी) नीति का निरूपण किया जिसने एनटीपीसी को बजट उपलब्ध कराने तथा न केवल सिंगरौली क्षेत्र में एनटीपीसी के विद्युत संयंत्रों में बल्कि सभी एनटीपीसी के अन्य विद्युत संयंत्रों में भी समुदाय विकास क्रियाकलाप करने में समर्थ बनाया। इस नीति को 2010 में आगे और संशोधित कर इसे अधिक व्यापक बनाया गया। सिंगरौली क्षेत्र में एनटीपीसी के विद्युत केन्द्रों को नीति के अनुसार समग्र बजट स्वीकृति के भाग के रूप में आवश्यकता और अपेक्षा के अनुसार वार्षिक बजट प्राप्त होने जारी रहे। यहाँ यह उल्लेख करना संगत है कि ये नीतियां न केवल इन पीएपीस को लक्षित करती है बल्कि पड़ोसी व आसपास के समुदाय को भी लक्षित करती हैं।

इसके अतिरिक्त, अधिगमों (लर्निंग्स) के आधार पर एनटीपीसी ने सिंगरौली क्षेत्र में अंगीकृत अपनी अभिनव पद्धतियों को भी अभिलेखबद्ध किया तथा 2005 में अपनी आर एवं आर नीति को संशोधित कर इसे और भी व्यापक बना दिया। इस नीति को वर्ष 2010 में और संशोधित किया गया तथा नई संकल्पनाओं/पहलों की शुरुआत की गई और पात्रताएं बढ़ाई गई। ग्रीन फील्ड/विस्तार परियोजनाओं के लिए वर्तमान में हो रहे भूमि अधिग्रहण बेहतर प्रावधानों के कारण लाभान्वित हो रहे है। एनटीपीसी का आर एवं आर मुद्दों का निवारण करने की दि शा में अपने दृश्टिकोण को उन्मुक्त तथा लचीला रखना जारी है तथा यह आवष्यकतानुसार नई पद्धतियां अपनाते हुए अधिगम (लर्निंग) मोड में बना हुआ है।

इसके अतिरिक्त, एनटीपीसी अब भारत सरकार की योजना के अनुसार विद्युतीकरण को सुगम बनाने तथा अपने विद्युत संयंत्रों की 5 कि.मी. की परिधि के भीतर विद्युत उपलब्ध कराने की परिकल्पना कर रहा है। यह पणधारकों के साथ एनटीपीसी के लाभ साझेदारी उपक्रम के भाग के रूप में इसका एक प्रमुख योगदान होगा। एनटीपीसी में सीएसआर तथा आर एवं आर का शीर्ष प्रबंधन में प्रतिबद्धता के साथ कार्यसूची के एजेंडा पर बने रहना जारी है। जहां तक एनटीपीसी का संबंध है यह परिकल्पित है कि इन क्षेत्रों में सदैव सकारात्मक घटनाक्रम होते रहेंगे।
 

विश्व बैंक के निष्कर्ष

पुनर्स्थापना तथा पुनर्वास (आर एवं आर) का निरीक्षण करने के लिए विश्व बैंक के एक मिशन ने 26-29 मई, 2003 के दौरान सिंगरौली क्षेत्र का दौरा किया। मिशन का निष्कर्ष यह था कि :

"हकदारिता का परिदाय लगभग पूर्ण हो चुका है तथा अवलोकन में मिले साक्ष्य तथा एनटीपीसी द्वारा अनुरक्षित रिकॉर्ड यह निर्दिष्ट करते है कि परियोजना प्रभावित अधिकांश लोगों ने आजीविका का सहारा ले लिया है या अपनी आजीविका में सुधार किया है तथा भावी मतभेदों या विवादों का समाधान करने के लिए पर्याप्त प्रक्रम सुव्यवस्थित तथा उपलब्ध हैं। एनटीपीसी ने रिहंद तथा विंध्याचल, दोनों परियोजना क्षेत्रों के आर एवं आर कार्यक्रम के प्रभाव मूल्यांकन के लिए सहमति प्रकट की। ऐसा मूल्यांकन सामाजिक संकेतकों के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से तथा साथ ही प्रभावित समुदाय के लिए भी आजीविका की बहाली (परावर्तन Degree of Restoration) के अंश का मूल्यांकन करने में सहायता करेगा। मूल्यांकन से आर एवं आर नीतिगत ढांचे की पर्याप्तता का मूल्यांकन भी होगा तथा भावी परियोजनाओं के लिए सीखे गए पाठों को अभिलेख बद्ध किया जाएगा है। यह सहमति हुई कि दिसम्बर, 2003 के अंत तक बैंक के परामर्श से यह मूल्यांकन पूर्ण कर लिया जाएगा। एड मेमोयर ने यह भी अभिस्वीकृत किया गया कि पीएपी ने आवास तथा अन्य अवसंरचना सहित अपनी आजीविका तथा अन्य रहन-सहन की दशाओं में सामान्यतः सुधार किया है। इसके अतिरिक्त एड मेमोयर में विश्व बैंक की अपेक्षा के अनुसार एक सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन का संचालन भी एनटीपीसी द्वारा आंतरिक रूप से ही किया गया था तथा निष्कर्ष मई, 2004 में विश्व बैंक को संसूचित किए गए। इसमें आजीविका बहाली से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष भी अभिलेखबद्ध किए गए।