कारपोरेट नागरिकता

पुनर्वास कालोनियों को सौंपा जाना

सिंगरौली क्षेत्र में एनटीपीसी परियोजनाओं की पुनर्वास कालोनियां मंत्रिमंडल सचिव के स्तर पर भारत सरकार के निर्णय के अनुसार राज्य सरकारों को सौंपी जानी थी। अपर सचिव की अध्यक्षता में 19.08.97 को आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की बैठक में भी इस पर सहमति हुई। तदनुसार, रिहंद की पुनर्वास कालोनी (आर. सी.) शक्ति नगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एसएसएडीए) को सौंप दी गई। उपर्युक्त के अतिरिक्त, एनटीपीसी ने 70 कि.मी. लम्बी ट्रंक रोड़ (परियोजना से रेणुकूट) का निर्माण किया है जो उत्तर प्रदेश राज्य में सोनभद्र जिले के म्यूरपुर ब्लॉक के 20 ग्रामों को जोड़ती है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश राज्य में सीधी जिले की एक अन्य 40 कि.मी. मुख्य सड़क (परियोजना से वैढन तक) का निर्माण भी किया गया है।

परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के जीवन स्तरों पर पहले से ही कुछ सकरात्मक प्रभाव पड़े हैं तथा एनटीपीसी ने सिंगरौली क्षेत्र के अंतर्गत इन सुपर ताप विद्युत परियोजनाओं में सामाजिक मुद्दों का निवारण करने में अपनी सक्रिय संबद्धता जारी रखी हैं।

इनमें निम्न शामिल हैं :

  • परियोजना के जरिए रेणुकूट तथा वैढन के बीच मुख्य सड़क के निर्माण के पष्चात्, उत्तर प्रदेश तथा मध्यप्रदेश के दो राज्य सड़क संपर्क में जुड़े गए हैं। इसके कारण, क्षेत्र के लोगों को अपने व्यवसाय स्थापित करने के लिए पष्च तथा अग्र संबंधन एवं अन्य सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
  • परियोजना प्रभावित व्यक्तियों की भूधारिता में लगभग दो गुना वृद्धि हुई है तथा साथ ही, अवसंरचना, विशेषकर सिंचाई के क्षेत्र के विकास के कारण खाद्यान्न उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। उनकी आय के स्रोत में भी एनटीपीसी द्वारा विकसित अवसंरचना यथा सड़कों, बिजली इत्यादि के द्वारा बढ़ोत्तरी है। ये लोग काफी सीमा तक अपनी स्थिति को सुधारने में समर्थ हुए हैं जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सशक्त हुई है।
  • इस अवधि के दौरान आर एवं आर योजना क्षेत्रों में साक्षरता स्तर 5 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत पर पहुंच गया है तथा इस तथ्य की तुलना में यह काफी महत्वपूर्ण है कि अप्रभावित ग्रामों में साक्षरता का स्तर अब 47 प्रतिशत है।
  • एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा अस्पताल की स्थापना के कारण मृत्यु दर में प्रभावी कमी आई है। राज्य सरकार के अध्ययन दर्शाते हैं कि इन क्षेत्रों में लोगों की सामान्य स्वास्थ्य दशाएं परियोजनाओं के आसपास के भागों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर हैं।
  • एनटीपीसी परियोजना प्राधिकारियों द्वारा पुनर्वास कार्यक्रम आरंभ करने से पूर्व आय/आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि था। अब अधिकांश पीएपी तथा उनके परिवार के सदस्य रोजगार/व्यवसाय में लगे हुए है। इस प्रकार, एनटीपीसी द्वारा किए गए प्रयासों के कारण प्रभावित लोगों के व्यवसाय में तथा आय स्तर में अवलोकनीय व तुलनीय अंतरण हुआ है।
  • अधिकांश पीएपी दूरस्थ ग्रामीण ग्रामों से पुनर्वास कालोनियों में अर्ध शहरी क्षेत्रों में अंतरित हो गए हैं जहां सड़कें, स्वच्छ पेयजल जैसी बेहतर आवसंरचना सुविधाआओं के साथ-साथ बेहतर चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ये सब इन लोगों के बेहतर जीवन स्तर में परिवर्तित हुए हैं।

ऐसे आयाम के किसी भी आर एवं आर कार्यक्रम में, कुछ चूकें हो सकती हैं तथा एनटीपीसी प्रबंधन प्रारम्भ से ही सचेत है कि जब कभी भी ऐसी चूकें हो, सुधार किया जाना है। पणधारकों के साथ वार्ता, आर एवं आर योजना के निरूपण तथा क्रियान्वयन तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना मुद्दों के निवारण के दौरान यथा अपेक्षित किसी अन्य सहायता के लिए प्रतिश्ठित एनजीओ की सेवाएं नियोजन पर ली गई है। जब कभी भी किसी एनजीओ ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन में कुछ कमियों को इंगित किया है, परियोजना प्रबंधन ने पूर्ण मनोयोग के साथ इनका समाधान किया है। सिंगरौली परियोजना प्राधिकारियों ने उन्मुक्त सोच के साथ विशय-वस्तु का आकलन किया है तथा यह सुनिष्चित करने के लिए उपचारी उपाय किए हैं कि सिंगरौली में एनटीपीसी के सी आर आर कार्यक्रम स्थायी विकास के मॉडल के रूप में उभरें। सिंगरौली में एनटीपीसी प्रबंधन सभी मित्रवत आलोचनाओं पर ध्यान देता है तथा प्राधिकारी सदैव पीएपी तथा स्थानीय ग्रामवासियों के साथ स्थिति सुधार हेतु सम्पर्क में रहते हैं।